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Sunday, Sep 05, 2010

Archive for March 8th, 2010

संगीता

राजेश

कैसे है आप सब? मेरी कहानी बरसात की रात पार्ट १ और २ आप लोगों को कैसे लगी? क्योंकि अभी तक मुझे कोई मेल नहीं मिला है खैर जल्दी से पढ़ कर मुझे मेल करें और जिन लोगों ने बरसात की रात पार्ट १ और २ पढ़ी है वो लोग जानते ही होनगे कि जिस आंटी को मैने चोदा था उसकी एक लड़की भी थी जिसका नाम संगीता था.

वेल, अब मैं अपनी कहानी शुरु करता हूं जब करीब हफ़्ता भर मैने आंटी को कायदे से चोद लिया तब मेरा मन उनसे भी उकता गया और जैसा कि मैं पहले कह चुका हूं कि उनकी १८ साल की संगीता पर मेरे लंड का दिल आ गया था लिहाजा अब किसी भी तरह से उसकी सील तोड़ना चाहता था मैं, पर आंटी को बुरा न लगे ये भी ख्याल था तब एक दिन मैं दिन में २ बजे आंटी के घर गया इत्तेफ़ाक से आंटी घर में नहीं थी सिरफ़ संगीता ही थी और अब तो वो भी मुझसे अच्छी तरह परिचित हो चुकी थी हेलो हाय होने के बाद जब मैने उससे पूछा कि आंटी कहां है? तब उसने कहा कि वो मार्केट गयी है और शाम तक आयेंगी ये कह कर वो मेरे लिये चाय बनाने चली गयी क्यों कि रामु भी नहीं था और आज वो बहुत ही छोटी सी फ़्रोक पहने थी उसे देख कर मेरी तमन्नायें जाग उठी थी उसकी गोरी – गोरी टांगे मुझे बहकाने के लिये काफ़ी थी जब वो चाय बना कर लायी तब वहीं सामने सोफ़े पर बैठ गयी और हम दोनो चाय पीने लगे.

अभी वो बहुत नादान थी सो उसे फ़्रोक पहन कर किस तरह बैठा जाता है ये भी शायद नहीं पता था जब वो सोफ़े पर बैठी तब उसकी पिंक पैंटी मेरी आंखों में गड़ गयी और मैं उसकी पैंटी के अंदर कुंवारी टाइट बुर के बारे में सोच कर ही टन्ना गया वो बहुत आराम से चाय पी रही थी और मैं उसकी चड्ढ़ी का नज़ारा देखते हुए उसको चोदने की प्लानिंग कर रहा था तब मैने कहा संगीता चलो कोइ सी.डी. ही देखी जाय? वो बोली मुझे कोई ऐतराज़ नहीं आपका घर है जो जी में आये करिये उसकी बात सुन कर मैने तुरंत टी.वी. ओन किया और एक हॉट और सेक्सी मूवी लगा दी उसमे जब रोमांटिक सीन आया तब मैने देखा कि संगीता कुछ सकपका रही है और नज़रें नीचे किये हुए ज़मीन की तरफ़ देख रही थी जब कि टी.वी. पर बहुत ही उत्तेजक शोट चल रहा था तब मैने उससे कहा जब तुमको पिक्चर नहीं देखनी थी तब किस लिये लगवायी है पिक्चर? वो बोली राज ऐसी बात नहीं है ये सीन बहुत गंदा है मुझे शरम आ रही है प्लीज़्ज़ज़ इसे फ़ोरवर्ड कर दो तब मैने कहा अरे पगली इसमे शरम किस लिये ये सब तो देखा ही जाता है और अगर देखा न जाता होता तो ये मूवी बनती ही क्यों तब वो बोली राज ये अडुल्ट मूवी है जब कि मैं अभी छोटी ही हूं अभी मैं सिर्फ़ १८ साल की ही हूं अगर मम्मी को पता लगा तो बहुत डाटेंगी प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़

उसकी बात सुन कर मुझे हंसी आ गयी और मैने उसकी थुड्ठी पर हाथ लगा कर कहा देखो ये लड़की जो मूवी में है वो भी कितनी छोटी है करीब तुम्हारी ही उमर की होगी ध्यान से देखो और वो गौर से टी.वी. पर देखने लगी जिसमे एक बहुत ही छोटी लड़की यही कोई १३-१४ साल की रही होगी उसको एक हट्टा कट्टा आदमी अपनी बाहों में भरे हुए था और उसकी छोटी छोटी चूचियों को उसकी फ़्रोक के उपर से ही मसल रहा था संगीता ने मुझसे पूछा राज ये आदमी क्या कर रहा है? मैने कहा इस लड़की की चूची दबा रहा है तब उसने कहा क्या लड़की को दर्द नहीं हो रहा होगा देखो ये कैसे सिसिया रही है? मैने कहा धत्त दर्द नहीं बल्कि लड़की को बहुत मज़ा आ रहा होगा और तब ही उस आदमी ने उसकी फ़्रोक की ज़िप खोल कर झट से उस लड़की को नंगा कर दिया अब वो लड़की पूरी तरह से नंगी थी सिरफ़ एक छोटी सी पैंटी पहने थे ये शोट देख कर संगीता ने सर झुका लिया उसका चेहरा लाल हो गया था

मैने उससे कहा अभी आगे देखो यही लड़की जो अभी सिसिया रही है कैसे मादक सिसकियां निकालेगी और फ़िर उस आदमी ने अपने सारे कपड़े उतार दिये तब संगीता ने कहा हाय राज कितनी गंदी पिक्चर है अब तो आदमी भी पूरा नंगा हो गया है तब मैने कहा अभी पूरा नंगा कहां हुआ है अभी तो ये अपनी अंडरवेअर भी उतारेगा देखो उसकी निक्कर कितनी तनी हुई है तब संगीता ने कहा हां राज इसकी निक्कर इतनी तनी हुई क्यों है? मैने कहा अभी देखती जाओ सब समझ में आ जायेगा और तभी उस आदमी ने अपनी निक्कर भी उतार दी जिससे उसका लंड पूरी तरह फ़न्नाया हुआ था उसे देखते ही संगीता ने अपना चेहरा झुका लिया और अपनी आंखों पर हाथ रख लिया तब मैने उसका हाथ हटाते हुए कहा देखो आज सब सीख लो कैसे लड़कियां जवानी के मज़े लेती हैं आज मौका भी अच्छा है मम्मी भी नहीं है तुम्हारी, इस लड़की की उमर भी तुम्हारी ही तरह है ऐसे शरमाओगी तो कुछ भी नहीं सीख पाओगी क्योंकि तुम्हारी मम्मी तुमको अभी बच्ची समझती है और करीब ७-८ साल बाद ही तुम्हारी शादी करवायेंगी क्योंकि उनको तो अभी अभी खुद ही ये सब करने से फ़ुरसत नहीं मिलती तब संगीता बोली हां मैं जानती हूं कि मम्मी अकसर तुम्हारे साथ सोती है तब मैने कहा सिर्फ़ सोती ही नहीं रानी वो जम कर चुदवाती है जब मैने ये कहा तो संगीता बोली धत्त कितनी गंदी बातें करते हो तुम राज तुम तो ज़रा भी नहीं शरमाते तब मैने कहा तुम्हारी मम्मी ने मुझे बिल्कुल चुदक्कड बना डाला है अरे यार ये तो कुछ भी नहीं जब रात को वो मुझसे चुदवाती है तब उसकी बातें अगर तुम सुन लो तो जान जाओगी कि तुम्हारी मम्मी कितनी चुदक्कड हैं।

और फ़िर हुम लोग मूवी देखने लगे उसमे उस आदमी ने अपनी निक्कर उतारने के बाद लड़की की कच्छी भी उतार दी और उसकी चिकनी चूत पर हाथ फ़ेरने लगा और उसकी चूची के निप्पलों को मुंह में डाल कर चुबलाने लगा ये सब देख कर जहां मेरा लौड़ा पैंट में अकड़ रहा था वहीं संगीता का चेहरा भी शरम से लाल हुआ जा रहा था मगर अब वो बहुत गौर से मूवी देख रही थी मैं भी सोच रहा था कि आज अगर इस पर हाथ भी फ़ेर दिया तो लड़की झट से चूत चुदवाने को राज़ी हो जायेगी मगर एक दिक्कत ये थी कि मैं चूत के चक्कर में उसकी मा की बम भोसड़ा चूत नहीं कुर्बान कर सकता था तो मैने सोच लिया था कि आज रात को आंटी को चोदते वक्त संगीता को चोदने की बात कर ही लेता हूं क्योंकि बता कर चोदना सही रहता है और मेरा तजुर्बा भी कहता था कि बुढ़िया फ़ौरन चुदवा देगी अपनी लड़की को क्योंकि उसको अपनी प्यास भी तो बुझवानी थी तब ही एक जोरदार आवाज़ ने मेरा ध्यान अपनी तरफ़ खींच लिया आवाज़ टीवी से लड़की के चीखने की आयी थी जिसकी छोटी सी चूत को उस आदमी ने अपना लम्बा सा औजार एक ही बार में डाल दिया था लड़की आआआआआआआययययीईईईई आआआआआह्हह्हह्हह्हह्ह आआआआआआआआअह्हह्हह्हह ऊऊऊऊओह्हह्हह गोड कर रही थी बहुत ही दर्द भरी चीखें निकल रही थी उसकी आंख से भी आंसू बह रहे थे मगर वो पहलवान बिना किसी बात की परवाह करे बगैर उसकी कुंवारी टाइट चूत में पूरा पूरा लंड ढासे हुए दना दन धक्के लगा रहा था और थोड़ी ही देर में उस लड़की की दर्द भरी कराह की जगह आनंद भरी आवाज़ निकलने लगी तब संगीता ने कहा राज अभी तो ये लड़की नो नो कर रही थी रो भी रही थी और अब तो मोर मोर कर रही है ये क्या चक्कर है

तब मैने कहा संगीता ये चुदायी का चक्कर ऐसा ही होता है पहले तो लड़की चुदवाती नहीं और जब चुदवाती है तब एक लंड भी कम पड़ जाता है और फ़िर थोड़ी ही देर बाद वो आदमी अपने लंड का रस उस लड़की की चूत में उड़ेलने के बाद अपने रस से भरे लंड को उस लड़की के मुंह में डालने लगा तब संगीता ने कहा हाय राम राज ये लड़की तो इसका लंड मुंह में ले रही है छी, कितनी गंदी लड़की है तब मैने कहा यार रात को आज तुम अपनी मम्मी की करतूत देख ही लेना जब अपनी आंख से देखोगी तब यकीन मानोगी कि तुम्हारी मां भी ऐसे ही मेरा लंड चूसती है और फ़िर मैने धीरे से उसकी फ़्रोक के उपर से उसकी चूची पर हाथ रख कर सहला दिया वो सिहर गयी और पीछे हट गयी मैं जानता था कि साली चुदासी तो हो ही चुकी है अगर अभी पटक कर चढ़ जाउं तो कुछ ज्यादा बोलेगी नहीं मगर मैं अभी इसको सिर्फ़ उपरी मज़ा देकर छोड़ देना चाहता था क्योंकि काफ़ी वक्त हो चुका था और आंटी के आने का भी वक्त हो चुका था

तब मैने संगीता को गोद में खींच लिया और उसकी छोटी छोटी चूची को बहुत प्यार से सहलाने लगा वो मेरी बाहों में कसमसा रही थी और हल्का सा विरोध भी कर रही थी तभी मैने अपना एक हाथ उसकी चिकनी चिकनी जांघों से फ़िराते हुए नीचे उसकी चड्ढ़ी के पास ले गया अब तो उसने अपनी दोनो टांगे एकदम भींच ली और मेरी तरफ़ बहुत दयनीय नज़रों से देखने लगी मगर मैने तो आज उसको पूरा जवानी का पाठ पढ़ा ही देना चाहता था मैने उसकी चड्ढ़ी के उपर से उसकी बुर कुरेदनी शुरु कर दी अब संगीता को थोड़ी मस्ती चढ़नी शुरु हो गयी उसने धीरे से अपनी टांग खोल दी और मैने उसकी चड्ढ़ी उतार दी अब वो सिर्फ़ उपर से फ़्रोक पहने हुए थी और मैं फ़्रोक के उपर से ही उसके निप्पलों को होंठ में भर कर दूसरे हाथ से उसकी बुर को कुरेदने लगा और फ़िर अपनी एक उंगली गैप से उसकी कोरी कोरी बुर में ढांस दी वो आआह्ह से चिल्ला उठी और मैं धीरे धीरे उसकी कुंवारी बुर में अपनी उंगली आगे पीछे करने लगा संगीता के चेहरे पर दर्द की लकीर साफ़ नज़र आ रही थी और वो अपने होंठों को दांतों से दबा रही थी और तभी मैने उसकी बुर के और अंदर तक अपनी उंगली घुसा दी अब तो वो बकायदा रोने ही लगी थी आआआह्हह्ह आआयीईईईई प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ राआआआज्ज आआअयीईईइ बहुत दर्द कर रही है निकाल लो प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ आआआआअह्हह्हह्हह ऊऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़ राज निकाल लो अपनी उंगली बहुत दर्द कर रही है आआआह्हह देखो अगर तुम नहीं मानोगे तो मैं मम्मी से कह दूंगी प्लीज़्ज़ज़्ज़ राज

अब तो मेरी हवा खराब हो गयी मैने सोचा कहीं बना बनाया खेल ना बिगड़ जाये और ये बुढ़िया से न कह दे तब मैने अपनी थोड़ी सी उंगली उसकी बुर के बहर निकाल ली और उसके बूब्स को फ़्रोक के उपर से बहुत अराम से दबाने लगा अब उसे कुछ राहत मिल रही थी और थोड़ी ही देर बाद वो अपने चूतड़ को नीचे से उचकाने लगी जब मैने देखा कि अब इसको थोड़ा मज़ा आने लगा है तो मैने अपनी उंगली उसकी बुर से निकाल ली अब वो मेरी शकल देखने लगी और जब उससे रहा नहीं गया तो खुद ही कहने लगी अब जब मुझे मज़ा आने लगा तो तुमने उंगली बाहर निकाल ली प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़ डालो न उंगली इसमे बहुत अच्छा लग रहा था तब मैने कहा अभी तो नखरे कर रही थी संगीता ने कहा कि नहीं नखरे वाली कोई बात नहीं जब तकलीफ़ हो रही थी तब ही तुमसे निकालने को कह रही थी अब डालने को भी तो कह रही हूं प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़ डाल दो न उंगली

तब मैने कहा आज बहुत देर हो गयी है अभी तुम्हारी मम्मी आने ही वाली है तुम ऐसा करना आज रात को पहले खूब अच्छी तरह से अपनी मम्मी की चुदायी देख कर सीख लेना कि कैसे चुदवाया जाता है तब कल मैं तुम्हे चोदुंगा ओ के मगर संगीता तो पूरी तरह चुदासी हो चुकी थी फ़िर मैने उस वक्त अपनी उंगली से ही उसका एक पानी झाड़ा और फ़िर उसको चड्ढ़ी पहनने को बोला और बताया कि आज रात को मैं जब तुम्हारी मम्मी की चुदायी करुंगा तब एक खिड़की खोल दूंगा ताकि तुम असानी से सब नज़ारा देख सको और उसके बाद मैने उस रात आंटी की २ बार गांड मारी और एक बार चूत और उसके बाद संगीता की कोरी कोरी बुर कैसे फ़ैलायी इसका जिक्र अगली कहानी में करुंगा

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दमन में चुदाई

मैं दमन में रहता हूं। हमारे पड़ोस में मेरा दोस्त रवि रहता है। रवि पड़ोस में अकेला रहता है उसके परेंट्स गांव में रहते हैं। एक बार उसकी मामी किसी अधिवेशन के सिलसिले से दमन आयी और उसके घर पर करीब २ महीने रही। सबसे पहले उसके मामी के विषय में आप लोगो बता दूं।

मामी का नाम फ़रीदा है वो करीब ४० साल की सांवली सुडोल शादी शुदा महिला है। वैसे तो वो हाउस वाइफ़ है लेकिन गांव में मशहूर समाज सेविका है। उसके चूतड़ और बूब्स काफ़ी बड़े बड़े और भारी है। शकल सूरत से वो खूब सेक्सी और ३० साल से कम लगती है।

अकसर में शनिवार या रविवार जो कि मेरे छुट्टी के दिन हैं, रवि के साथ गुजारता हूं। जब से उसकी मामी आयी है तब से मैं मामी से २-३ बार मिल चुका हूं। वो जब भी मिलती तो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी मुझे देख कर उसकी नज़रों में एक अजीब नशा छा जाता था या यूं कहिये उसकी नज़र में सेक्स की चाहत झलक रही हो ऐसा मुझे क्यों महसूस हुआ यह मैं बता नहीं सकता हूं लेकिन मुझे हमेशा ही लगता था कि वो नज़रो ही नज़रो से मुझे सेक्स की दावत दे रही हो। मैं जब भी उनसे मिलता तो कम ही बातचीत करता था मगर जब वो बातें करती तो उनकी बातों में दोहरा अर्थ होता था। जैसे हार्दिक तुम खाली समय में कुछ करते क्यों नहीं? मैने कहा मामी जी क्या करु आप ही बतायें। वो बोली तुम्हे खाली समय का और मौके का फायदा उठाना चाहिये। मैने कहा जरूर फायदा उठाउंगा अगर मौका मिले तो। वो बोली मौका तो कब से मिल रहा है लेकिन तुम कुछ समझते नहीं न ही कुछ करते हो?

मैं उनकी बातें सुन कर चकराया और बोला मामी जी आप की बातें मेरे दिमाग में नहीं घुस रही हैं। वो बोली देखो हार्दिक आज और कल यानि शनिवार और रविवार तुम्हारी छुट्टी होती है तो तुम्हे कुछ कुछ पार्ट टाइम जोब करना चाहिये ताकि तुम्हारी आमदनी भी हो जायेगी और टाइम पास भी होगा। इसी तरह की दोहरे शब्दो में मामी जी बातें करती थी और वो जब भी मुझसे बातें करती तब रवि या तो बाथरूम में होता या फिर किसी काम में व्यस्त होता।

एक दिन जब सुबह करीब ११ बजे रवि के घर पहुंचा तो घर पर उसकी मामी थी। रवि मुझे कहीं नज़र नहीं आया। मैने पूछा मामी जी रवि नज़र नहीं आ रहा है कहां गया वो?

मामी: वो बाथरूम में कब से नहा रहा है। मैं उसीका बाहर निकलने का इन्तज़ार कर रही हूं।

हार्दिक: लेकिन वो तो ज्यादा समय बाथरूम में लगाता ही नहीं तुरंत ५ मिनट में आ जाता है।

मामी हंसते हुए: अरे भाई, बाथरूम और बेडरूम ही तो ऐसी जगह है जहां से कोई भी जल्दी निकलना नहीं चाहता है। मैं कोई जवाब नहीं दे सका वो भी चुप रही। थोड़ी देर बाद रवि बाथरूम से नहा धो कर बाहर आया। उसके बाथरूम से आते ही मामीजी बाथरूम में गयी और मेरी तरफ़ नशीली नज़रों से देखती हुयी बोली घबराना मत मैं ज्यादा समय नहीं लगाउंगी। आप लोग नाश्ते के लिये मेरा इन्तज़ार करना, कहते हुए वो बाथरूम में घुस गयी करीब २० मिनट बाद वो तैयार होकर हमारे साथ नाश्ता करने लगी।

नाश्ता करते वक्त रवि ने कहा यार आज मुझे ओफ़िस के काम के सिलसिले में सुरत जाना है। और मैं कल रात को या सोमवार दोपहर को वापस लौटूंगा। अगर सोमवार दोपहर को लौटूंगा तो तुम्हे कल फोन कर दूंगा। अगर तुम्हे ऐतराज़ न हो तो क्या तुम जब तक मैं नहीं आता हूं मेरे घर रुक जाना ताकि मामी को बोरियत महसूस नहीं होगी न ही मुझे उनकी चिंता रहेगी क्योंकि वो दमन में पहली बार आयी हुई हैं। मैने कहा ठीक है नो प्रॉब्लम । और वो १२:३० बजे वाली ट्रेन से सूरत चला गया। मैं भी उसे ट्रेन मे बिठाने के लिये बोरिवली गया जब वापस लौट रहा था तो एक रेस्तौरेंट मे जाकर ३ पेग व्हिस्की पी और लौट कर रवि के घर गया।

घर पर मामी जी हाल मे बैठ कर कोई किताब पढ़ रही थी। मुझे नशीली निगाहों से देखा और बोली रवि को बैठने की सीट मिल गयी थी क्या ? मैने कहा हां क्योंकि ट्रेन बिल्कुल खाली थी। वो बोली कि मैने खाना बना लिया है भूख लगी हो तो बोल देना। मैने कहा अभी भूख नहीं है जब होगी तो बोल दूंगा। मामी की निगाहों में अजीब नशा देख कर मैने पूछा। मामी जी करती क्या हैं? थोड़ी देर तक मेरे नज़रों से नज़रे मिलाती रही फिर बोली “समाज सेवा” ये सुनते ही अचानक मेरे मुंह से निकल गया कभी हमारी भी सेवा कर दीजिये ताकि हमारा भी भला हो जाये। वो हल्के से मुसकुराई और बोली तुम्हारी क्या प्रोब्लम है? मैने कहा वैसे तो कुछ खास नहीं है लेकिन बता दूंगा जब उचित समय होगा। वो मेरे आंखों में आंखें डालती हुए बोली यहां तुम्हारे और मेरे आलावा कोई नहीं है बेझिझक प्रोब्लम कह डालो शायद मैं तुम्हारी प्रोब्लम हल कर दूं?

मैने कुछ नहीं कहा आप किस प्रकार की समाज सेवा करती हो वो बोली मैं जरुरतमंद लोगो की जरुरत पूरी करने की मदद करती हूं उनकी समस्या हल करती हूं। मैने कहा कि मेरी भी जरुरत पूरी करदो न, वो बोली जब वक्त आयेगा तो कर दूंगी फिर वो चुप रही और मैगज़ीन पढ़ने लगी। थोड़ी देर बाद मैने पूछा, मामी जी आप क्या पढ़ रही हैं कुछ खास सब्जेक्ट है क्या इस मैगज़ीन में? वो मुस्कुराते हुए बोली “इस मैगज़ीन में बहुत अच्छा लेख है पत्नी और पति के सेक्स के विषय में। फिर वो पढ़ने लगी। थोड़ी देर बाद उसने पूछा हार्दिक ये उत्तेजना का क्या मतलब होता है? मैं सोचने लगा वो मेरी ओर कातिल निगाहों से देखती हुयी बोली बताओ न। मेरी समझ में नहीं आया कि हिंदी में उसे कैसे बताउं। वो लगातार मेरी और देख रही थी। उसकी आंखों में नशा छाने लगा। मैं उसे गौर से देख रहा था उसके होंठ खुश्क हो रहे थे। वो अपने होंठों पर जीभ फेर रही थी। मैने सोचा अच्छा मौका है मामी को पटाने का। वो इठलाकर बोली बताओ न क्या मतलब होता है? उसकी इस अदा को देखते हुए मैने कहा शायद चुदास। वो बोली क्या कहा क्या मतलब होता है? मैने कहा क्या तुम चुदास नहीं समझती हो? वो बोली कुछ कुछ… क्या यही मतलब होता है? मैने कहा हां शायद यानि कि……।कैसे समझाउं तुम्हे मामीजी मैने उलझ कर कहा।

वो हंसते हुए बोली चुदास का मतलब सेक्स करने की चाहत तो नहीं। मैं उसे एकटक देखने लगा उसके होंठो पर चंचल मुस्कुराहट थी। मैने कहा ठीक समझी आप। वो मेरे आंखो में आंखे डाल कर बोली किस शब्द से बना है चुदास? मैने उसकी आवाज में कंपकपी महसूस की। मेरे दिल ने कहा गधे वो इतना चांस दे रही है तु भी बन जा बेशरम वरना पछतायेगा। मैने कहा चुदास चोदना शब्द से बना है वो खिलखिला कर हंसने लगी और मैगज़ीन के पन्ने पलटने लगी। मैं सोचने लगा अब क्या करुं अचानक उसने पूछा ये वेजिना क्या होता है। मेरे दिल ने कहा साली जानबूझ कर ऐसे सवाल पूछ रही है। मैने बिंदास होकर कहा योनि को वेजिना कहते हैं। वो फिर पूछी यह योनि क्या होता है। मैने कहा क्या आप योनि नहीं जानती हो? वो बोली नहीं। मैने कहा चूत समझती हो। वो झट से मुंह पर हाथ रखा और मैगज़ीन के पन्ने पलटती हुयी बोली हां। मैने हिम्मत कर के कहा चुदास की बहुत चाहत हो रही है। वो हल्के से मुस्कुराते हुए कहा चुदास की प्यास? मैने कहा वाकई चुदास की प्यास लगी है। वो बोली मैं भी २ साल से प्यासी हूं क्योंकि २ साल पहले मेरा पति से तलाक हो गया था। मैने कहा ओह इसका मतलब कि २ साल से तुम्हारी चूत ने लंड का पानी नहीं पिया है। वो सिर झुका कर बोली आज तक तुम्हारे जैसा कोई मिला ही नहीं।

मैं बोला अगर मिल जाता तो। वो बोली तो मैं अपनी चूत को उस लंड पर कुर्बान कर देती। मैं बोला आओ मेरा लंड तुम्हारी चूत पर न्यौछावर होने के लिये बेकरार है। तुरंत उसे अपने बाहों में ले लिया और उसके होंठ में होंठ डाल कर चुम्बन करने लगा मैने महसूस किया कि उसके हाथ मेरे लंड की तरफ़ बढ़ रहे थे और उसने पैंट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को पकड़ लिया फिर धीरे धीरे सहलाने लगी। मेरा लंड लोहे की तरह सख्त हो गया। मुझसे बरदास्त नहीं हुआ और मैं पैंट और अंडरवेअर निकाल कर बिल्कुल नंगा हो गया। अब वो फिर मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुंह में ले लिया और लोली पोप की तरह चूसने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। कभी वो मेरे लंड के सुपाड़े को चूसती, कभी जबान से लंड को जड़ तक चाट रही थी ऐसा उसने करीब १५ मिनटे तक किया। आखिर में रहा न गया मैने उसके मुंह में ढेर सारा वीर्य डाल दिया। फिर हम दोनो सोफ़े पर आकर बैठ गये। मेरा लंड फिर सामान्य हो गया। वो अब भी साड़ी पहने हुयी थी मैने उसकी साड़ी में हाथ डाल कर जांघो को सहलाया फिर हाथ को उसके चूत पर ले गया। उसकी पैंटी गीली हुयी थी इतनी गीली थी जैसे पानी से भिगोयी हो। मैने उसके पैंटी के ऊपर से ही चूत को मसलना शुरु किया। वो बिन पानी के मछली की तरह तड़पने लगी। फिर मैने उसकी पैंटी में हाथ डाला। उसकी चूत फूली हुयी और गरम बत्ती की तरह सुलग रही थी।

मैने उसकी चूत की दरार में उंगली डाल कर चूत के दाने को मसलने लगा जिस कारण वो बेकरार होने लगी। अब मैने उसे सोफ़े पर लिटा कर उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर सरकाया। उसकी पैंटी चूत के अमृत से तर-बतर थी। मैने पैंटी को पकड़ा और झांघो तक सरका दिया। अब वो खुद उठ कर अपनी पैंटी निकाल दी और फिर सोफ़े पर लेट गयी। उसकी घुटने ऊपर थे और टांगे फैली हुयी थी। उसकी सांवली चूत अब बिल्कुल साफ़ साफ़ दिखायी दे रही थी। मैने अपने एक उंगली उसकी चूत में डाली तो मुझे लगा मैने आग को छू लिया हो क्योंकि उसकी चूत काफ़ी गरम हो चुकी थी। मैने धीरे धीरे अपनी उंगली उसके चूत में अंदर बाहर करने लगा उसके मुंह से आअह्हह्हाअ ऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़ की आवाज निकल रही थी। अब मैने २ उंगलियां उसकी कोमल चूत में घुसाई। चिकनी चूत होने से दोनो उंगलियां आराम से अंदर बाहर हो रही थी। लगभग पचास साठ बार मैने अपनी उंगलियों से उसकी चूत की घिसाई की। इधर मेरा लंड भी फूल कर तन गया था। अब मैं उठ खड़ा हुआ और उसे लेकर बेडरूम मे ले गया। वो आंखे बंद किये मेरे अगले कदम का इन्तज़ार करने लगी। मैने शर्ट निकाल कर उसकी साड़ी और पेटिकोट दोनो उतार दिये और हम बिल्कुल नंगे हो गये। वो करवट लेकर लेट गयी। अब उसके चूतड़ साफ़ झलक रहे थे। मैने उसक गांड पर हाथ सहलाया। क्या गांड थी। गोल मटोल गांड थी उसकी।

मैं करीब ५ मिनट तक उसकी गांड को सहलाता रहा फिर उसकी कमर पकड़ कर चित लिटा दिया। और जितना हो सका उतनी उसकी टांगे फैला दिया फिर उसकी चूत की दरारों को फैला कर अपनी जीभ से चूत चाटने लगा। उसके मुंह से हाअ ऊऊफ़्फ़फ़्फ़ की नशीली आवाजे निकल रही थी। अपनी जीभ से उसकी चूत के एक एक भाग चाट रहा था। बीच बीच में चूत को जीभ से चोद रहा था। वो बिल्कुल पूरी तरह से गरम हो चुकी थी। वो बोली अब हटो हार्दिक। मेरी चूत काफ़ी गरमा चुकी है।

अपना लंड मेरी गरमगरम चूत में घुसेड़ दो राजा। उफ़्फ़फ़। अपने लंड से मेरी चूत की गरमी और प्यास बुझा दो मेरे हार्दिक आज इतना कस कस कर चोदो कि मेरे पूरे अरमान निकल जाये। जैसे ही मैने उसकी चूत से अपना मुंह हटाया उसने अपनी टांगे मोड़ ली। मै उसके उठि हुयी टांगो के बीच बैठ गया। मैने उसकी टांगे अपने हाथ से उठा कर अपना लंड उसके चूत के मुंह में रखा जिस कारण उसके शरीर में झुरझुरी मच गयी। लंड को चूत के मुंह में रखते ही चूत की चिकनाहट के कारण अपने आप अंदर जाने लगा। मैने कस कर एक धक्का मारा तो लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुस गया। गरमा गरम चुत के अंदर लंड की अजीब हालत थी। अब मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा। उसकी चूत के घर्षण से मेरा लंड फूल कर और मोटा हो गया। मेरे हर धक्के पर वो ऊऊफ़्फ़फ़्फ़ आआह्हह ऊऊह्हह्हह की आवाजे निकालने लगी। करीब २० मिनट तक मैं उसके चूत में अपना लंड अंदर बाहर करता रहा फिर मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी और दना दन लंड को चूत में मूसल की तरह घुसाता रहा वो मुझे कस कर बाहों में जकड़ ली मैं समझ गया कि वो झड़ रही है। और करांह रही थी। बोल रही थी। हाय! हार्दिक २ साल बाद मेरी चूत की खुजली मिटी है। वाकई तुम पक्के चुदक्कड़ हो।

चोदो मुझे जोर जोर से चोद। मेरा लंद फच फच की आवाज के साथ अंदर बाहर हो रहा था। पूरे कमरे में चुदाई की फ़चाफ़च फ़चाफ़च की आवाजे गूंज रही थी। मेरा लंड उसकी चूत को छेदता जा रहा था कुछ देर बाद उसके झड़ने के कारण मेरा लंड बिल्कुल गीला हो चुका था और वो निढाल होकर लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी। करीब ५० -६० धक्को के बाद मेरे लंड ने आखिर जोरदार फ़ौव्वारा निकला और उसकी चूत में समा गया। जब तक लंड से एक एक बूंद उसकी चूत में समाती रही मैं धक्को पर धक्के लगाता रहा। आखिर में मैने अपना लंड बाहर निकाला और उसके बाजु में लेट गया। हम दोनो की सांसे तेज चल रही थी वो दाहिने करवट से लेटी हुई थी। करीब १५ -२० मिनट तक हम ऐसे ही लेटी रही। फिर मेरी नज़र उसकी गांड पर पड़ी। गांड का ख्याल आते ही लंड फिर से हरकत करने लगा।

मैने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर रख कर घुसाने की कोशिश की। उसकी गांड का छेद बहुत टाइट था। मैने ढेर सारा थूक उसकी गांड के छेद पर और अपनी उंगली पर लगाया और दुबारा उसकी गांड में उंगली घुसाने की कोशिश करने लगा। गीलेपन के कारण मेरी उंगली थोड़ी गांड में घुस गयी उंगली घुसते ही वो कसमसाहट करने लगी। वो तड़प कर आगे खिसकी जिस वजह से उंगली गांड के छेद से बाहर निकल गयी और मुड़ कर बोली क्या कर रहे हो। मैने कहा तुम्हारी गांड सचमुच खूबसूरत है। वो बोली उंगली क्यों घुसाते हो लंड क्या सो गया है? उसकी यह बातें सुनकर मैं खुश हुआ और उसे पेट के बल लिटा दिया और दोनो हाथों से उसकी चूतड़ को फ़ैला दिया जिस से उसकी गांड का छेद और खुल गया। वो धीरे से बोली हार्दिक, नारियल तेल, घी या कोई चिकनी चीज मेरे गांड और लंड पर लगालो तो आसानी रहेगी।

मैने कहा मैडम इस से भी अच्छी चीज है मेरे पास वेसलीन, और मैं उठ कर ड्रायर से वेसलीन ले आया। और ढेर सारी वेसलीन अपने लंड और उसकी गांड पर लगाया और उसकी गांड मारने को तैयार हो गया। अब मैने अपना लंड उसकी गांड के सुराख पर लगाया और थोड़ा जोर लगा कर पुश किया। लंड का सुपाड़ा गांड में थोड़ा सा घुस गया। फ़िर थोड़ा जोर लगा कर और पुश किया तो सुपाड़ा उसकी गांड में समा गया। सुपाड़ा गांड में घुसते ही वो बोली हार्दिक थोड़ा आहिस्ते आहिस्ते डालो दर्द हो रहा है, २ साल हो गये गांड मरवाये। अब मैं सिर्फ़ सुपाड़े को ही धीरे धीरे गांड के अंदर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद ही उसकी गांड का छेद पूरा लंड खाने के काबिल हो गया। मुझे लगा अब मेरा लंड पूरा उसकी गांड में घुस जायेगा और ऐसा ही हुआ।

उसकी गांड का छेद चिकनाहट की वजह से, लंड थोड़ा थोड़ा और अंदर समाने लगा। २-३ मिनट की मेहनत से मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी गांड में घुस गया। मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड से अंदर बाहर करने लगा। उसकी टाइट गांड होने से मुझे बड़ा मजा आ रहा था। उसे भी गांड मरवाने का मजा आ रहा था और मुंह से ऊफ़्फ़ आह्हा की आवाजे निकाल रही थी। ४०-५० धक्को के बाद मेरे लंड ने घुटने टेक दिये और उसकी गांड में ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया वो भी अपनी गांड को सिकोड़ने लगी। अब हम दोनो निढाल होकर बिस्तर पर लेट गये। जब तक मेरा दोस्त नहीं आया मैने उसकी मामी की कई बार चूत और गांड मारी। जब मैं वापस अपने घर लौटने लगा तो मामी बोली। कैसी रही मेरी समाज सेवा। और मैने हंस कर कहा, मामी जी आप सच्चे तन मन से समाज सेवा करती हो फिर मैं घर लौट आया

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कैसे मैने नौकरानी को फ़क किया

दोस्तों, लड़की को उत्तेजित करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बस उत्तेजित करने का तरीका ठीक होना चाहिये। मैने अपनी घर की नौकरानी को ऐसे ही उत्तेजित कर खूब चोदा। अब सुनो उसकी दास्तान। मेरा नाम है साहिल। मैं लखनऊ यू पी का हूं, मेरे घर में ऊल-ज़ुलूल नौकरानियों के काफ़ी अरसे बाद एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी नौकरानी काम पर लगी। २२-२३ साल की उमर होगी। सांवला सा रंग था। मीडियम हाईट की और सुडौल बदन, फ़ीगर उसका रहा होगा ३३ -२६ -३४ । शादी शुदा थी। उसका पति कितना किस्मत वाला था, साला खूब चोदता होगा।

बूब्स यानि चूचियां ऐसी कि बस दबा ही डालो। ब्लाउज़ में समाती ही नहीं थी। कितनी भी साड़ी से वो ढकती, इधर उधर से ब्लाउज़ से उभरते हुई उसकी चूचियां दिख ही जाती थी। झाड़ु लगाते हुए, जब वो झुकती, तब ब्लाउज़ के उपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा न सकती। एक दिन जब मैने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा कि उसने ब्रा तो पहना ही नहीं था। कहां से पहनती, ब्रा पर बेकार पैसे क्यों खर्च किये जायें। जब वो ठुमकती हुई चलती, तो उसके चूतड़ हिलते और जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबाओ। अपनी पतली सी सूती साड़ी जब वो सम्भालती हुई सामने अपने बुर पर हाथ रखती तो मन करता कि काश उसकी चूत को मैं छू सकता। करारी, गरम, फूली हुई और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था। काश मैं इसे चूम सकता, इसके मम्मे दबा सकता, और चूचियों को चूस सकता। और इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मज़ा ले सकता।

और फिर मेरा तना हुआ लौड़ा इसकी बुर में डाल कर चोद सकता। हाय! मेरा लंड ! मानता ही नहीं था। बुर में लंड घुसने के लिये बेकरार था। लेकिन कैसे। ये तो मुझे देखती ही नहीं थी। बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती। मैने भी उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिये बेताब है। अब चोदना तो था ही। मैने अब सोच लिया कि इसे उत्तेजित करना ही होगा। धीरे धीरे उत्तेजित करना पड़ेगा वरना कहीं मचल जाये या नाराज़ हो जाये तो भांडा फूट जायेगा। मैने उससे थोड़ी थोड़ी बातें करनी शुरु की। उसका नाम था आरती। एक दिन सुबह उसे चाय बनाने को कहा। चाय उसके नरम नरम हाथों से जब लिया तो लंड उछला। चाय पीते हुए कहा, आरती, चाय तुम बहुत अच्छी बना लेती हो। उसने जवाब दिया, बहुत अच्छा बाबूजी। अब करीब करीब रोज़ मैं चाय बनवाता और बढ़ाई करता। फिर मैने एक दिन कोलेज जाने के पहले अपनी शर्ट प्रेस करवाई। आरती, तुम प्रेस भी अच्छा ही कर लेती हो।

ठीक है बाबूजी, उसने प्यारी सी आवाज़ में कहा। जब कोई नहीं होता, तब मैं उससे इधर उधर कि बातें करता। जैसे, आरती, तुम्हारा आदमी क्या करता है? साहब, वो एक मिल में नौकरी करता है। कितने घंटे की ड्युटी होती है? मैने पूछा। साहब, १०-१२ घंटे तो लग ही जाते हैं। कभी कभी रात को भी ड्युटी लग जाती है। तुम्हारे बच्चे कितने हैं? मैने फिर पूछा। शरमाते हुए उसने जवब दिया, अभी तो एक लड़की है, २ साल की। उसे कय्अ घर में अकेला छोड़ कर आती हो? मैं पूछता रहा। नहीं, मेरी बूढ़ी सास है न। वो सम्भाल लेती हैं। तुम कितने घरों में काम करती हो? मैने पूछा। सहब, बस आपके और एक नीचे घर में। मैने फिर पूछा, तो क्या तुम दोनो का काम तो चल ही जता होगा। सहब, चलता तो है, लेकिन बड़ी मुश्किल से। मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बर्बाद कर देता है। अब मैने एक हिंट देना उचित समझा। मैने सम्भलते हुए कहा, ठीक है, कोई बात नहीं। मैं तुम्हारी मदद करूंगा। उसने मुझे अजीब सी नज़र से देखा, जैसे पूछ रही हो – क्या मतलब है अपका। मैने तुरंत कहा, मेरा मतलब है, तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ, मैं उसे समझाऊंगा। ठीक है सहब, कहते हुए उसने ठंडी सांस भरी।

इस तरह, दोस्तों मैने बातों का सिलसिला काफ़ी दिनों तक जारी रखा और अपने दोनो के बीच की झिझक को मिटाया। एक दिन मैने शरारत से कहा, तुम्हारा आदमी पागल ही होगा। अरे उसे समझना चाहिये, इतनी सुंदर पत्नी के होते हुए, शराब की क्या ज़रूरत है। औरत बहुत तेज़ होती है दोस्तों। उसने कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी एहसास नहीं होने दिया अपनी ज़रा सी भी नाराज़गी का। मुझे भी ज़रा सा हिंट मिला कि ये तस्वीर पर उतर जायेगी। मौका मिले और मैं इसे दबोचूं। चुदवा लेगी। और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा। कहते हैं ऊपर वाले के यहां देर है लेकिन अंधेर नहीं। रविवार का दिन था। पूरी फ़ैमिली एक शादी मैं गयी थी। मैने पढ़ाई में नुकसान की वजह बताकर नहीं गया। कह कर गयी थी, आरती आयेगी, घर का काम ठीक से करवा लेना।

मैने कहा, ठीक है, और मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा। वो आयी, दरवाज़ा बंद किया और काम पर लग गयी। इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसी लिये उसने दरवाज़ा बंद कर दिया था। मैने हमेशा कि तरह चाय बनवाई और पीते हुए चाय की बढ़ाई की। मन ही मन मैने निश्चय किया कि आज तो पहल करनी ही पड़ेगी वरना गाड़ी छूट जायेगी। कैसे पहल करें? आखिर में ख्याल आया कि भाई सबसे बड़ा रुपैया। मैने उसे बुलाया और कहा, आरती, तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताना। झिझकना मत। सहब, आप मेरी तनख्वाह से काट लोगे और मेरा आदमी मुझे डांटेगा। अरे पगली, मैं तनख्वाह की बात नहीं कर रहा। बस कुछ और पैसे अलग से चाहिये तो मैं दूंगा मदद के लिये। और किसी को नहीं बताऊंगा। बशर्ते तुम भी न बताओ तो। और मैं उसके जवाब का इन्तज़ार करने लगा। मैं क्यों बताने चली। आप सच मुझे कुछ पैसे देंगे? उसने पूछा।

बस फिर क्या था। कुड़ी पट गयी। बस अब आगे बाधना था और मलाई खानी थी। ज़रूर दूंगा आरती। इससे तुम्हे खुशी मिलेगी न, मैने कहा। हां साहब, बहुत आराम हो जायेगा। उसने इठलाते हुए कहा। अब मैने हल्के से कहा, और मुझे भी खुशी मिलेगी। अगर तुम भी कुछ न कहो तो। और जैसा मैं कहूं वैसा करो तो? बोलो मंज़ूर है? ये कहते हुए मैने उसे ५०० रुपये थमा दिये। उसने रुपये टेबल पर रखा और मुसकुराते हुए पूछा, कया करना होगा साहब? अपनी आंखें बंद करो पहले। मैं कहते हुए उसकी तरफ़ थोड़ा सा बढ़ा, बस थोड़ी देर के लिये आंखें बंद करो और खड़ी रहो।

उसने अपनी आंखें बंद कर ली। मैने फिर कहा, जब तक मैं न कहूं, तुम आंखें बंद ही रखना, आरती। वरना तुम शर्त हार जायोगी। ठीक है, साहब, शरमाते हुए आंखें बंद कर वो खड़ी थी। मैने देखा कि उसके गाल लाल हो रहे थे और होंठ कांप रहे थे। दोनो हाथों को उसने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था।

मैने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन किया। अभी मैने उसे छुआ नहीं था। उसकी आंखें बंद थी। फिर मैने उसकी दोनो पल्कों पर बारी बारी से चुम्बन रखा। उसकी आंखें अभी भी बंद थी। फिर मैने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा। उसकी आंखें बंद थी। इधर मेरा लंड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था। फिर मैने उसकी थुड्ठी पर चुम्बन लिया। अब उसने आंखें खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा, साहब? मैने कहा, आरती, शर्त हार जायोगी। आंखें बंद। उसने झट से आंखें बंद कर ली। मैं समझ गया, लड़की तैयार है, बस अब मज़ा लेना है और चुदाई करनी है।

मैने अब की बार उसके थिरकते हुए होंठों पर हल्का सा चुम्बन किया। अभी तक मैने छुआ नहीं था उसे। उसने फिर आंखें खोली और मैने हाथ के इशारे से उसकी पल्कों को फिर ढक दिया। अब मैं आगे बढ़ा, उसके दोनो हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारों तरफ़ घुमाया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके कांपते होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमता रहा। कस कर चूमा अबकी बार। क्या नरम होंठ थे मानो शराब के प्याले। होंठों को चूसना शुरु किया और उसने भी जवाब देना शुरु किया। उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होंठों को खूब चूस चूस कर मज़ा ले रहा था। तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियां जो कि तन गयी थी, मेरे सीने पर दब रही हैं। बायें हाथ से मैं उसकी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रहा था, जीभ से उसकी जीभ और होंठों को चूस रहा था, और दायें हाथ से मैने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया।

दायां हाथ फिर अपने आप उसकी दायीं चूची पर चला गया। और उसे मैने दबाया। हाय हाय क्या चूची थी। मलाई थी बस मलाई। अब लंड फुंकारे मार रहा था। बायें हाथ से मैने उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लंड को महसूस करवाया। शादी शुदा लड़की को चोदना आसान होता है। क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है। घबराती नहीं हैं। ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, ब्लाउज़ के बटन पीछे थे, मैने अपने दायें हाथ से उन्हे खोल दिया और ब्लाउज़ को उतार फेंका। चूचियां जैसे कैद थी, उछल कर हाथों में आ गयी। एक दम सक्थ लेकिन मलाई की तरह प्यारी भी। साड़ी को खोला और उतारा। साया बस अब बचा था। वो खड़ी नहीं हो पा रही थी। मैं उसे हल्के हल्के खींचते हुए अपने बेडरूम में ले आया और लिटा दिया। अब मैने कहा, आरती रानी अब तुम आंखें खोल सकती हो।

आप बहुत पाजी हैं साहब, शरमाते हुए उसने आंखें खोली और फिर बंद कर ली। मैने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया। लंड तन कर उछल रहा था। मैने उसका साया जल्दी से खोला और खींच कर उतारा। कोई अंडरवेअर नहीं पहना था। मैने बात करने के लिये कहा, ये क्या, तुम्हारी चूत तो नंगी है। चड्ढी नहीं पहनती। नहीं साहब, सिर्फ़ महीना में पहनती हूं। और शरमाते हुए कहा, सहब, पर्दे खींच कर बंद करो न। बहुत रोशनी है। मैने झट से पर्दों को बंद किया जिससे थोड़ा अंधेरा हो और उसके ऊपर लेट गया। होंठों को कस कर चूमा, हाथों से चूचियां दबाई और एक हाथ को उसके बुर पर फिराया। घुंगराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर। फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूची को मुंह में ले लिया। आहा, क्या रस था। बस मज़ा बहुत आ रहा था। अपनी एक उंगली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसके बुर में घुसाया। उंगली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छूरी। गरम और गीली थी। उसकी सिसकारियां मुझे और भी मस्त कर रही थी। मैने छेड़ते हुए कहा, आरती रानी, अब बोलो क्या करूं?

साहब, मत तड़पाइये, बस अब कर दीजिये। उसने सिसकारियां लेते हुए कहा। मैने कहा, ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान।

मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा, साहब, डाल दीजिये न। क्या डालूं और कहां? मैने शरारत की। दोस्तों चुदाई का मज़ा सुनने में भी बहुत है। डाल दीजिये न अपना ये लौड़ा मेरे अंदर। उसने कहा और मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका लिये। इधर मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे। कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता कभी उसके होंठों को चूसता। अब मैने कह ही दिया, हां रानी, अब मेरा ये लंड तेरी बुर में घुसेगा। बोलो चोद दूं।

हां हां, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये। और वो एकदम गरम थी। मैने कहा, ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा, साहब, डाल दीजिये न। क्या डालूं और कहां? मैने शरारत की। डाल दीजिये न अपना ये लौड़ा मेरे अंदर। अब मैने कह ही दिया, हां रानी, अब मेरा ये लंड तेरी बुर में घुसेगा। बोलो चोद दूं। हां, हां, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये। और वो एकदम गरम थी।

फिर क्या था, मैने लंड उसके बुर पर रखा और घुसा दिया अंदर। एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लंड के लिये ही बनी थी। दोस्तों, फिर मैने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होंठों से उसके गाल और होंठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया। बस चोदता ही रहा। ऐसा मन कर रहा था कि चोदता ही रहूं। खूब कस कस कर चोदा। बस चोदते चोदते मन ही नहीं भर रहा था। क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। उछल उछल चुदवा रही थी।

साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खुब चोदिये, चोदना बंद था, टांगे उसने मेरे चूतड़ पर घुमा रखी थी और चूतड़ से उछल रही थी। खूब चुदवा रही थी। और मैं चोद रहा था। मैं भी कहने से रुक न सका, आरती रानी, तेरी चूत तो चोदने के लिये ही बनी है। रानी, क्या चूत है। बहुत मज़ा आ रहा है। बोल न कैसी लग रही है ये चुदाई। साहब, रुकिये मत, बस चोदते रहिये, चोदिये, चोदिये, चोदिये,। इस तरह हम न जाने कितनी देर तक मज़ा लेते हुए खूब कस कस कर चोदते हुए झड़ गये।

क्या चीज़ थी, एकदम चोदने के लिये ही बनी थी शायद। दोस्तों मन नहीं भरा था। २० मिनट बाद मैने फिर अपना लंड उसके मुंह में डाला और खूब चुसवाया। हमने ६९ पोसिशन ली और जब वो लंड चूस रही थी मैने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया। खास कर दूसरि बार तो इतना मज़ा आया कि मैं बता नहीं सकता। क्योंकि अब की बार लंड बहुत देर तक चोदता रहा। लंड को झड़ने में काफ़ी समय लगा और मुझे और उसे भरपूर मज़ा देता रहा। कपड़े पहनने के बाद मैने कहा, आरती रानी, बस अब चुदवाती ही रहना। वरना ये लंड तुम्हे तुम्हारे घर पर आकर चोदेगा। साहब, आप ने इतनी अच्छी चुदाई की है, मैं भी अब हर मौके में आपसे चुदवाउंगी। चाहे आप पैसे न भी दो। कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसकी चूचियों को हल्के हल्के मसलते रहे। और मैं उसके गालों और होंठों को चूमता रहा। एक हाथ उसके बुर पर चला जाता था और हल्के से उसकी चूत को दबा देता था।

साहब अब मुझे जाना होगा। कह कर वो उठी। मैने उसका हाथ अपने लंड पर रखा, रानी, एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नहीं उतारूंगा। दोस्तों, सच में लंड खड़ा हो गया था और चोदने के लिये मैं फिर तैयार। मैने उसे झट से लिटाया, साड़ी उठाई, और अपना लौड़ा उसके बुर में पेल दिया। अबकी बार खचखच चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा। चोदते चोदते पता नहीं कब लंड झड़ गया और मैने कस कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। चूमते हुए चूचियों को दबते हुए, मैने अपना लंड निकाला और उसे विदा किया। कैसी लगी ये वारदात, सच सच बताना। बताना ज़रूर। मैं इंतज़ार करूंगा।

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मैं और मौसी

मैं आकाश गुजरात से अपको एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूं, जो मेरे साथ हुई थी, तब मेरी उमर १५ साल की थी, अब अपको अपनी कहानी बताता हूं, मेरी एक मौसी बहुत ही सेक्सी और मस्त लेकिन मैने उनको कभी इस नज़रों से देखा नहीं था, लेकिन एक दिन की बात, मैं गर्मियों की छुट्टियों में उनके घर गया था अकेला, उनके परिवार में वो, मेरी मौसाजी और एक छोटी लड़की थी, मौसी देखने में गोरी, चिट्टी और बहुत सेक्सी थी, उनका फ़ीगर ३८-३२-३८ था थोड़ी मोटी थी लेकिन अच्छी थी उनकी उमर ४५ साल थी और मेरी १५।

एक दिन मौसाजी किसी काम से बाहर गये थे घर में मैं और मौसी और उनकी लड़की जो ४ साल की थी इतने ही लोग थे, मैं बाहर खेल के लौटा तकरीबन ९ बजे थे उनकी बेटी सो गयी थी तब, मौसी बोली बेटा आज बहुत गर्मी है जाओ नहा लो, मैं ने कहा नहीं मैं बहुत थक चुका हूं, वो बोली नहीं चलो मैं तुम्हे नहलाती हूं चलो और वो आ गयी बाथरूम में, उन्होने मेरी शर्ट निकाल दी, और पैंट भी, अब मैं सिर्फ़ अपनी निक्कर में था, मौसी उसे भी निकालने जा रही थी मैं ने कहा नहीं मौसी मुझे शर्म आती है, वो बोली ऐसे नहीं चलेगा ठीक से नहाना तो पड़ेगा, और एक ही झटके में मेरी निक्कर निकाल दी अब मैं बिल्कुल नंगा खड़ा था, और वो मुझे सेक्सी निगाहों से देख रही थी, उस टाइम मेरा लंड छोटा सा था ४” का और वो नहलाते नहलाते उससे खेलने लगी, उसके बाद से उनकी निगाहें मेरी तरफ़ अलग नज़र से देखने लगी।

थोड़े दिन ऐसे ही बीत गये, एक दिन हम दोनो रात को अकेले थे, वो बोली आज रात तुम मेरे कमरे में ही सोना, मुझे अकेले डर लग रहा है मैने कहा ठीक है, मैं रात को उनके कमरे में गया सोने के लिये, वो बोली बहुत गर्मी है, मैं ने कहा हां मौसी, वो बोली इन कपड़ो मे बहुत गर्मी लगेगी निकाल दे, और वो भी अपने कपड़े निकालने लगी, उन्होने ब्लु साड़ी पहन रखी थी बहुत सेक्सी लग रही थी, वो निकाल दी, और ब्लाउज़ भी, अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में ही थी, और मैं सिर्फ़ अपनी निक्कर में था, उन्होने लाइट बुझा दी और हम सो गये, थोड़ी देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि कोई मुझे छू रहा है और लंड को सहला रहा है, मैं जग गया, देखा तो मौसी प्यासी निगाहों से देख रही थी मुझे।

मैने कहा मौसी ये क्या कर रही हैं आप, वो बोली कि तुम मुझे अच्छे लगते हो, तेरे मौसा को तो काम से फ़ुरसत ही नहीं है, और वो मुझसे लिपट गयी और मुझे चूमने लगी, और अपना पेटीकोट निकाल दिया वो अब सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी बहुत ही सेक्सी दिख रही थी, मैं भी उत्तेजित हो चुका था, मैने अब तक किसी को छुआ भी नहीं था, और वो बहुत एक्सपर्ट थी, उनके बड़े बड़े मम्मे और बड़े चूतड़ उफ़्फ़ क्या सीन था, मैं उनके मम्मो को चूसने लगा ब्रा के ऊपर से ही, उन्होने अपनी ब्रा भी निकाल दी और बहुत पागलों की तरह मुझे किस करने लगी, और निक्कर के ऊपर से ही लंड को सहलाने लगी, उन्होने मुझे नंगा कर दिया और लंड चूसने लगी, जैसे कोई लोलीपोप हो, वो बोली बहुत मस्त लंड है

उस टाइम मेरा लंड छोटा था पर उनको अच्छा लगा, अब मेरी घबराहट थोड़ी दूर हो चुकी थी, और मैं भी रिस्पोंस दे रहा था, उनके निप्पल को चूस रहा था, वो बोली बेटे ऊपर आ जाओ मैं उन्हे किस कर रहा था पूरी बोडी पर, अब मैं ने उनकी पैंटी भी निकाल दी, क्या मस्त चूत थी, एक भी बाल नहीं था, वो बोली चूसो इसे, मैं चूसने लगा वो आह, आह की आवाज़ें निकाल रही थी, फ़िर उन्होने मेरा लंड पकड़ के चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगी और मैं भी धक्के लगा रहा था धीरे से एक दम फ़ास्ट चोद रहा था उन्हे, मुझे बहुत मज़ा आने लगा था अब, फ़िर उन्होने मुझे लिटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गयी और धक्के लगाने लगी, फ़िर हमने डौगी स्टाइल में भी किया उनके चूतड़ बहुत ही मस्त थे, मैं उनको पकड़ कर चोद रहा था, फ़िर हम दोनो १ घंटे के बाद झड़ गये, और उसी रात को हमने दो बार और किया, फिर नंगे ही सो गये, फिर सुबह वो जल्दी उठ गयी थी, मुझको उठाया और हम दोनो साथ में ही नंगे नहाये, मेरा तो ये पहला एक्सपेरिएंस ही था लेकिन खूब एन्जॉय किया फिर तो हमने कई और बार सेक्स किया जब भी मौका मिलता।

दोस्तो कैसी लगी कहानी ज़रूर बताना

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मैने अपनी मौसी की लड़की को चोदा

गजेन्द्र

हेल्लो, मै इन्दोर के पास एक छोटे कस्बे में रहता हूँ

अब मैं अपनी कहानी लिखता हूं जो मेरे साल २ महीने पहले हुई थी।

मैं रेलवे कालोनी में रहता हूं। वहीं मेरे घर के पास मेरी मौसी का घर है। उनकी एक मस्त बेटी है जिसका नाम शालू है और उमर २७ की है। मैं उससे हमेशा से ही खुल के बात किया करता था और सोचता था कि कब मुझे उसको हाथ लगाने का मौका मिल जाये।

कहते हैं न “भगवान के घर देर है अंधेर नहीं”

वो दिन आ ही गया। एक दिन अचानक हमारे घर पे खबर आयी कि मेरा भी किसी क्रिस्टियन लड़की से शादी करने के लिये मेरे घर आयेगा। हम लोगो ने उस दिन पूरी तैयारी कर ली। शादी हुई और लंच का टाइम हो गया। क्युंकि उनको जल्दी भी जाना था इसलिये हम लोगो ने लंच दिन में ही कर लिया।

अब मेरी मौसी की लड़की भी उस दिन मेरे ही घर पे थी। उसने खाना खाया और उसके दादा के लिये खाने की थाली बनाकर ले गयी और मुझे भी साथ में चलने को कहा। मैं तो खुशी के मारे उछल पड़ा और उसके साथ चला गया। उसके दादा को कुछ न दिखाई देता था न ही कुछ सुनायी देता था। हमने उनको खाना दिया और हम दोनो अंदर चले गये। थोड़ी देर हमने इधर उधर की बातें की उसके बाद मैने धीरे से उससे पूछ लिया कि उसका कोई बोयफ़्रेंड है या नहीं। उसने कहा नहीं और वो शरमा गयी मैने कहा मेरी भी कोई गर्लफ़्रेंड नहीं है। फिर हम दोनो चुपचाप २ मिनट तक वैसे ही बैठे रहे। मैं सोच रहा था कि अब हिम्मत कर के उसको पकड़ ही लेना चाहिये। मैं ये बात कब से जानता था कि उसको भी कुछ चाहिये। मैं धीरे से उठा और उसके पीछे आ के खड़ा हो गया और धीरे से उसके गाल पे मैने अपनी उंगली घुमाई तो वो एक दम खड़ी हो गयी और कहने लगी कि ये क्या कर रहा है। मैने कहा कुछ नहीं मैं तुझे किस करना चाहता हूं और मैने हिम्मत कर के अपने होंठ उसके होंठ से चिपका दिये। इसका उसने कुछ विरोध नहीं किया।

फिर वो भी मेरा साथ देने लग गयी। मैने उसके सूट के उपर से उसके बूब्स पकड़ लिये और धीरे धीरे दबाने लग गया। वो मुंह से आआआआआआअह्हह्हह्हह्हह की आवाज़ निकाल रही थी। करीब ५ मिनट तक ऐसा ही चला उसके बाद मैने अपना एक हाथ उसके सलवार में डाल दिया और उसकी अंडरवेअर के अंदर हाथ डाल के उसकी चूत के अंदर उंगली की। उसने जोर से चीखा।

बाकी की स्टोरी पार्ट २ में सुनाउंगा थोड़ा सस्पेंस भी तो रहना चाहिये।

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