Posts Tagged ‘साली’
Thursday, 3 June 2010 22:12 No Comments
मैं अब बड़ी हो गई हूँ। मेरी माहवारी चालू हुए भी चार साल हो चुके हैं। मेरी चूंचियाँ भी उभर कर काफ़ी बड़ी बड़ी हो गई हैं। मेरी चूत में अब पहले से अधिक खुजली हुआ करती है। उसकी गहराई अधिक हो गई है। मेरे चूतड़ अब और सुडौल हो गये हैं। मेरी गर्दन भी अब सुराहीदार और खूबसूरत हो गई है।
मेरा भाई मुझसे बस डेढ़ वर्ष ही छोटा है।
उसका लण्ड तो बहुत ही सोलिड जान पड़ता था। जब वो सोता था तो उसका लण्ड कभी कभी खड़ा हो जाता था। छोटी सी चड्डी में से वो खम्बे की भांति खड़ा नजर आता था। उसे देख कर मेरा दिल भी बेईमान हो उठता था। दिल में खलबली मच जाती थी। कई बार तो मैं अपनी चूत को हाथ से दबा लेती थी। शायद यह उम्र भी बेईमान होती है। उसे भाई बहन के रिश्तों का भी ध्यान नहीं रहता है।
मेरा भाई भी कम नहीं है, वो भी मेरे अंगों को अब घूरने लगा था। मेरे अकेलेपन का फ़ायदा वो उठाने लगा था। वो हंसी हंसी में कितनी ही बार मेरे चूतड़ों पर हाथ मार देता था। छुप-छुप कर स्नान के समय वो मुझे झांक कर देखता था। उसकी इस हरकत से मुझे रोमांच हो उठता था। अब मैं भी उसको स्नान करते समय झांक कर देखती थी। जब वो लण्ड पर साबुन मलता, तो मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
आज मैंने बाथरूम के अन्दर कपड़ों में छुपा हुआ मोबाईल देखा। उसके कैमरे का कोण मेरी वीडियो लेने के हिसाब से लगाया था। मेरे मन में वासना जाग उठी…
सोचा आज भैया को सब कुछ दिखा ही दूं, शायद भैया पिघल ही जाये और हमारे बीच शर्म की दीवार टूट जाये। मैंने बड़ी अदा से एक एक कपड़ा उताड़ा और चूतड़ मटकाते हुये मैं अपने आपको मोबाइल में कैद करवाने लगी। चूत को और चूतड़ों को साबुन से मल मल कर और चूंचियों को सेक्सी तरीके से मल मल कर उसे दिखाने लगी। फिर अपने चूतड़ों को उभार कर और उसके दोनों पट खोल कर अपना चूतड़ों के मध्य केन्द्र बिन्दु भी दर्शा दिया। फिर अपनी चूत सामने करके चूत को सहलाते हुये अन्दर अपनी अंगुली भी डाल कर उसे बताई। अन्त में अपना मटर जैसा दाना भी हिला कर बताया। फिर साधारण तरीके से कपड़े पहने और बाहर निकल आई।
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Monday, 19 April 2010 18:58 No Comments
हाय ! मै गुजरात से रवि २१ साल का हूं। आज मै आपको अपनी गर्ल फ़्रेंड गीतू जो २० साल की है, की एक सच्ची घटना बता रहा हूं।
हमारी दोस्ती को हुए १.५ साल हो गया था पर मैने उसे अब तक छुआ तक नहीं था। एक दिन जब हम रोक गार्डन गये हुए थे तो मैं उसे सिर्फ़ किस ही किया और जब मैं उसके बूब्स पर हाथ लगाने लगा तो वो गुस्सा कर गई और कम से कम एक महीने मुझसे बात नहीं की, आखिर मैने भी उसे एक दिन मना ही लिया और उसको कहा के ये सब तो चलता रहता है तो वो बोली के मेरे को ये सब अच्छा नहीं लगता तो मैने कहा के अच्छा नहीं लगता तो नहीं करूंगा, उस दिन के बाद हम दोनो मिलते तो थे पर किस तक ही सीमित थे, पर अब मेरे से सब्र नहीं होता था और मैं उसे चोदने की योजना बनाने लगा।
फिर एक बार जब मैं गरमियों में उससे मिलने गया तो वो बोली कि आज तुम ओफ़िस से छुट्टी कर लो आज बैठ के बातें करेंगे, तो मैने ओफ़िस फोन कर के बोल दिया के आज मैं नहीं आउंगा, उसके बाद हम दोनो कुछ देर उसके कोलेज में ही बैठे रहे। फिर मैने उससे पूछा कि कहीं चलते हैं तो वो भी मान गयी पर उस टाइम १२.४० बज रहे थे उस टाइम न तो हमें फ़िल्म का टिकट मिलना था न ही हम किसी गार्डन में जा सकते थे क्योंकि दिल्ली में अधिकांश १२:३० तक सारे सिनेमा में शो स्टार्ट हो जाते हैं और गार्डन में इसलिये नहीं जा सकते हैं क्योंकि वहां पर गर्मी बहुत होती है।
फिर मैने कहा के मेरे रूम पर चलते हैं पर वो मना कर रही थी कह रही थी कि मुझे डर लगता है कि कही कुछ हो गया तो, पर मैने उसे तसल्ली दी और कहा कि अगर तुम्हे मुझ से प्यार है और अगर तुम मुझ पर भरोसा करती हो तो चल सकती। इस पर वो बोली कि तुम मेरी कसम खाओ के तुम ऐसा वैसा कुछ नहीं करोगे मैने उसकी कसम खा ली और वो तैयार हो गई। रास्ते में सोचता रहा के कसम तो खा ली पर उसको चोदुंगा कैसे।
फिर जब मैं और वो मेरे रूम पर पहुंचे तो मैने दरवाजा बंद करने लगा, तो वो बोल पड़ी के दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो मैने कहा कि अगर कोई देख लेगा तो क्या कहेगा कि कौन है और मैने दरवाजा बंद कर दिया। उसके बाद मैं बेड पर उसके साथ बैठ गया और बातें करने लगे, बातें करते करते मैने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसके लिप्स पर किस करने लगा पर ये किस १५ मिनट तक चलता रहा और मैं उसकी छाती पर हाथ फिराना शुरु कर दिया उसने विरोध नहीं किया और धीरे धीरे मैं उसकी वेली से होता हुआ उसकी चूत को सलवार के ऊपर से हाथ सहलाने लगा। अब मेरे लिप्स उसके लिप्स से किस कर रहे थे और एक हाथ उसके बूब्स पर और एक हाथ उसकी चूत पर था। अब मैं धीरे धीरे उसकी गर्दन और उसके बाद उसके बूब्स को कमीज के ऊपर से चूसने करने लगा तो उसके मुंह से अजीब से आवाजें आने लगी तो मैं समझ गया कि अब वो गरम हो चुकी है उसके बाद मैने धीरे धीरे एक हाथ कमीज के अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स को दबाने लगा।
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Monday, 19 April 2010 18:52 No Comments
दोस्तों ये मेरी चौथी कहानी है पहले मैने मेरी चुदाई बताई थी मेरे जीजा कमल से, फ़िर मेरी लड़कियों की चुदायी और अब मेरी छोटी बहन और मेरा जीजा कमल।
दोस्तों ये बात है उन दिनों की है जब मेरी छोटी बहन रेनु मेरे घर आयी थी मेरा पति आनंद अपनी ड्युटी पर चला गया था। रेनु को कोलेज में जाना था सो वो मेरे पास रहने लगी।
आनंद के जाने के २ दिन बाद ही रेनु ने मुझसे कहा “दीदी ये कमल जो आता है उस का और तेरा कोई चक्कर है क्या। मैने मना किया तो वो बोली “दीदी ये तो नहीं हो सकता वो रोज़ आता है और मेरे कोलेज जाने के समय आता है। मैने कल ही वापिस आ के देखा था आप दोनो ने रूम बंद कर लिया था।”
“अरे तेरे को कोई गलतफ़हमी होगी। ऐसा कुछ नहीं है” ये कह के मैं चुप हो गयी और उसने भी सवाल नहीं किये। पर मैने सोचा अगर रेनु ने देख ही लिया है तो क्यों न मैं इसको ही कमल से चुदवा दूं । सो मैने धीरे धीरे रेनु को छेड़ना शुरु कर दिया। कभी उसकी चूची दबाती तो कभी उसकी गांड पर हाथ मारती। शुरु में तो रेनु ने थोड़ी शरम की फ़िर वो भी मेरे को छेड़ने लग गयी। मैने पूनम को भी कह दिया कि तू रेनु को कमल के लिये तैयार कर दे इधर मैन भी उस को तैयार करती हूं।
सो हम दोनो मां बेटी रेनु को छेड़ने लग गयी। कमल को मैने बता ही दिया था सो वो भी रेनु से बातें करने लगा। रेनु भी उस से बात करती, कमल ने उस को स्टडी का ओफ़र किया। मैने भी रेनु को कह दिया कि तू कमल से पढ़ लिया कर।
वो मान गयी और मैने और पूनम ने रेनु को ज्यादा छेड़ना शुरु कर दिया। १ दिन मैं और रेनु ही घर में थे। कमल आ गया और रेनु को अपने पास बिठा लिया। ” रेनु आज मैं तेरे को देर तक पढ़ाउंगा, तू कुछ काम करना चाहती है तो जल्दी से कर ले। ” रेनु ने कहा “नहीं जीजा जी मेरा कोई काम नहीं है वो तो रोशनी ही कर लेगी। आप तो मेरे को पढ़ा दो”।
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Saturday, 17 April 2010 09:12 No Comments
मैं उस समय कॉलेज में पढ़ती थी। मेरा एक बॉय-फ़्रेंड था सुधीर, जो मेरा क्लासमेट था। मेरे और उसके बीच सम्बंध तीन महीने से था। सुधीर एक छ्ह फ़ुट का खूबसूरत लड़का था। साफ़, गोरा रंग पर पढ़ने में कोई खास नहीं था, एक औसत विद्यार्थी था।
मैं अपनी स्कूटी से कॉलेज जा रही थी, तभी सुधीर ने आवाज लगाई,”कामिनी…. एक मिनट…….. !”
मैंने पलट कर देखा तो सुधीर दूर पान की दुकान पर कुछ लड़कों के साथ खड़ा था, जो पहनावे से ठीक नहीं लग रहे थे। सुधीर भागता हुआ आया
“सुनो …. आज तो मैं कॉलेज नहीं जाउंगा…. पर कल सुबह जरूर मिलना….!”
“क्यों….कल क्या है?…. और ये लड़के कौन हैं जो तुम्हारे साथ हैं….?”
“परसों मेरी बहन और मां आ रही हैं…. कल घर में कोई नहीं है…. गप्पे मारेंगे …. फिर परसों के बाद कोई चांस नहीं है….!”
“सच…. तो कल कॉलेज…. गोल….!! ” मैंने अपनी स्कूटी आगे बढ़ा दी….वो वापिस अपने दोस्तों में चला गया। उसका घर यहां से पास ही था। मैं खुश हो गई, काफ़ी दिनो बाद सुधीर ने अपने घर आने को कहा था। मैं कॉलेज में भी और फिर घर पर भी अपने और सुधीर के बारे में सोचती रही। मुझे यह सोचना बड़ा अच्छा लग रहा था कि हम अकेले में क्या क्या बातें करेंगे। कहीं अकेले में वो मुझे छेड़ेगा तो नहीं…. क्या करेगा …. और मैं उसके साथ प्यार कैसे करूंगी…. सोचते हुए ही रोंग़टे खड़े हो रहे थे….।
दूसरे दिन सुधीर उसी पान वाले की दुकान के सामने मिल गया…. वही अपने कुछ अजीब से दोस्तों के साथ। मुझे देख कर वो भागता हुआ आया और मेरी स्कूटी पर बैठ गया।
“पीछे मुड़ो और सामने वाला घर मैंने किराये पर ले रखा है….!”
मैं उस घर में एक बार पहले भी आ चुकी थी। पर उस समय उसकी मां और बहन भी थी। मैंने अन्दर स्कूटी रखी इतनी देर में सुधीर ने घर का ताला खोल दिया। अब हम दोनों घर के अन्दर थे। अन्दर आते ही उसने मुझे चूतड़ों के नीचे से हाथ का ग्रिप बना कर ऊपर उठा लिया। उसके मुँह से बीड़ी की या कुछ और चीज़ की दुर्गंध आई।
” छि: छि: अपना मुँह धो कर आओ….बल्कि ब्रश भी करो….!”
उसे मेरा कहना अच्छा नहीं लगा….पर उसने ब्रश करके मुह को साफ़ कर लिया।
“बस अब तो ठीक है ना….!” मुस्करा कर उसने अपनी बाहें फ़ैला दी। मैं उसके पास जाकर उससे लिपट गई।
“हां….अब देखो कितने अच्छे लग रहे हो….” मैंने उसे चूम लिया। एकबारगी मुझे लगा कि सुधीर कोई नशा किये हुए है। उसकी आंखो में मुझे वासना के डोरे तैरते नजर आये। मुझ पर भी धीरे धीरे वासना क रंग चढ़ने लगा। हम एक दूसरे को बुरी तरह चूमने लगे। वो मेरे अंगों को दबाने लगा। मेरी चूंचियाँ कड़ी हो गई। मैं मदहोश होने लगी। मेरी चूत गीली होने लगी थी।
“कामिनी…. आज कुछ करें…. मेरा मन बहक रहा है….!”
“मेरे राजा…. मेरा मन भी बहक रहा है…. कुछ करो ना….”
सुधीर ने अपना हाथ मेरी टॉप के अन्दर डाल दिया और मेरी चूंचियाँ दबा दी। उसका लण्ड भी मुझे चोदने के लिये उतावला हो रहा था। उसके कड़े लण्ड को मैंने अपने अपने हाथ में भींच लिया। उसके मुख से आह निकल गई। मैं भी बेकाबू होती जा रही थी।
“….ये पैण्ट तो उतारो…. बड़ा तड़प रहा है बेचारा……..!”
सुधीर ने अपना पैंट उतार दिया….फिर कमीज और बनियान भी उतार दिया। इतनी देर में मैंने भी अपनी जीन्स उतार दी और टॉप भी उतार दिया। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे खड़े थे। उसका शरीर देख कर मैं उत्तेजित हो उठी। खास करके उसका कठोर और तन्नाया हुआ लण्ड देख कर मेरी चूत फ़ड़क उठी। उसके लण्ड को पकड़ कर सुपाड़े की चमड़ी मैंने ऊपर खींच दी। उसका लाल सुपाड़ा चमक उठा। उसने अपने बिस्तर पर मुझे बैठा दिया…. फिर हम दोनों किस करते हुए बिस्तर की चौड़ाई पर लेट गये। मेरे मन में आनन्द की हिलौरे आने लगी, मैं मन ही मन में चुदाई के लिये बेताब हो उठी… मेरे दोनों पांव नीचे ही थे। सुधीर ने नीचे खड़े हो कर ही अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया। मैंने अपनी चूत थोड़ी सी फ़ैला दी। उसने अपना लण्ड मेरी चूत पर रख दिया और हौले से अन्दर घुसा दिया। मैं आनन्द से भर गई। उसने अब एक ही धक्के में पूरा लण्ड अन्दर घुसा डाला। मुझे थोड़ी सी तकलीफ़ हुई…. पर सहन कर गई।
“सुधीर…. धीरे धीरे डालो ना….!”
पर वो अब कहां सुनने वाला था। उसने तो एकदम से ही तेज धक्के चालू कर दिये। मुझे अब तो वास्तव में लगा कि वो नशे में है….उसके मुख से अब कुछ तेज गन्ध आने लगी थी। जो मेरे आनन्द को रोक रहा था। उसकी आँखों में लाल डोरे बढ़ गये थे। जाने मुझे आज मजा नहीं आ रहा था। उसके चोदने में नरमाई बिलकुल नहीं थी…. मुझे तकलीफ़ भी हो रही थी…. । ऐसा लगा कि ना जाने क्यों आज सुधीर बहुत अधीर था और शायद जल्दी में नजर आ रहा था….
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Saturday, 17 April 2010 09:03 No Comments
बात उन दिनों की है जब मुंबई में दंगे चल रहे थे। पुणे में भी कुछ दिनों के लिए बस सर्विस बंद थी।
मैं उन दिनों पुणे के लिए एक बस में चली। बस में मेरी बगल में उषा नाम की आंटी बैठी थीं। उषा आंटी से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई।
बस बड़ी धीरे सफर कर रही थी। शाम के 2 बजे बस ख़राब हो गई। बस वाले ने कहा अब बस नहीं चलेगी। पुणे ४० किमी दूर था। बस में मैं और आंटी ही अकेली औरतें थीं। मैं घबरा रही थी बस में कुछ गुण्डे टाइप लोग भी थे जो रास्ते भर हमें गंदे गंदे इशारे कर रहे थे।
आंटी मुझसे बोली- मैंने टैक्सी बुलाई है, तुम पुणे तक साथ चल सकती हो लेकिन उसके आगे रास्ते बंद हैं। मैं खुश हो गयी, मैंने कहा- आंटी मैं आपके साथ रुक जाऊंगी।
आंटी बोली ठीक है लेकिन मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूँ। आंटी ने कहा- बेटी, मैं एक कोठे की मालकिन हूँ मेरा कोठा बुधवार पेठ में है वहाँ पर ५० -६० लड़कियां धंधा करती हैं। पूरे दिन रात उनकी चुदाई होती है। पर यह मेरा वादा है कि अगर तुम मेरे साथ चलोगी तो तुम्हारी मर्जी के बिना मैं तुम्हारी चुदाई तो नहीं होने दूंगी लेकिन तुम्हारी चूची और चूतड़ दब सकते हैं, मतलब तुम्हारी जवानी लुटेगी तो नहीं लेकिन मेरे गुंडे मस्ती करने से बाज़ नही आयेंगे। बाकी अगर कहीं और रूकती हो तो जवानी लुट भी जायेगी और ब्लू फ़िल्म अलग से बन जायेगी, मुझे पुणे का सब पता है, वैसे तुम शादीशुदा हो कोठे पे छेड़छाड़ से मजा ही आएगा।
आंटी की बात सुन मैं डर गई लेकिन मेरी चूत में खुजली सी भी मची कि कोठे की मस्ती में मज़ा तो बहुत आएगा।
मैंने- कहा आंटी, यहाँ चूत तो चुदेगी ही, जान का भी खतरा है। यह बस के ही लोग मुझे चौद डालेंगे, सब गुण्डे टाइप लग रहे हैं। आप ले चलो, कोठे पे ही सही।
थोड़ी देर में आंटी की टैक्सी आ गई। हम उसमें बैठ गए। आंटी ने पुणे से ५-६ किलोमीटर पहले ही मुझे बुरका पहना दिया और ख़ुद भी बुरका पहन लिया।
शाम ४ बजे हम बुधवार पेठ में आंटी के कोठे पे थे। कोठे पे हमारे घुसते ही एक मुस्टंडे ने मेरे चूतड़ पीछे से दबा दिए और बोला- मौसी माल तो बड़ा तगड़ा लायी हो, आज्ञा हो तो नंगा कर दूँ कुतिया को।
मौसी ने कहा- हरामी हाथ मत लगाइयो, मेहमान है, चल बेटी अंदर चलें।
अंदर रंडियाँ अर्द्धनग्न खड़ी थी कुछ पेटीकोट और आधे से ज्यादा खुले ब्लाऊज़ पहने थी.
मौसी मुझे चौंकते देख कर बोली- अरे चौंक क्यों रही है यह कोठा है, रात को दिखाउंगी कैसे यह रंडियाँ ६-६ लंड खाती हैं. आ चल थोड़ा फ्री हो लें। तुझे भी तो थोड़ी रंडीबाजी सिखा दूँगी, ताकि तुझे याद तो रहे की कभी कोठे की सैर भी की थी। घबरा मत तेरी चूत तभी चुदेगी जब तू चाहेगी लेकिन मर्दों के लंड तो पकड़ ही सकती है और चूची चूतड़ तो दबवा ही सकती है। रोज रोज एस मस्ती तो नही मिलेगी। परमानेंट रंडी बनने में तो प्रॉब्लम हैं लेकिन एक दिन रंडीबाजी करने में तो मज़ा ही मज़ा है।
मौसी की बात मुझे कुछ सही लगी। मैं और आंटी अब आंटी के कमरे में आ गई थी। कमरा फाइव स्टार जैसा था। आंटी ने अपनी साड़ी ब्लाउज उतार दिया। आंटी की चूचियां पपीते जैसे लटक रहीं थी, आंटी सिर्फ़ पेटीकोट पहने थीं। आंटी ने घंटी बजाई, एक मुस्टंडा अंदर आया, आंटी बोली- कालू जरा पानी-वाणी पिला !
आंटी मुझे देखकर मुस्करा कर बोली- शरमा रही है, अभी तुझे नंगा कराती हूँ, कोठे की मस्ती तो चख ले।
मैंने कहा- नहीं मौसी, मुझे नंगा नही होना !
